New Health Study: आज के तेज दौर में बड़ी संख्या में लोग शिफ्टों में काम करते हैं, ऐसे लोगों के लिए अपना डेली रूटीन कायम रख पाना आसान नहीं है. लेकिन इसके बावजदू हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम खाना एक तय टाइम पर ही करें.

Health Study: हम क्या खाते हैं यह जितना जरूरी है उतना ही अहम यह भी है कि हम किस समय पर खाना खा रहे हैं. आज के तेज दौर में बड़ी संख्या में लोग शिफ्टों में काम करते हैं, ऐसे लोगों के लिए अपना डेली रूटीन कायम रख पाना आसान नहीं है. लेकिन इसके बावजदू हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम खाना एक तय टाइम पर ही करें. विशेष तौर पर रात का खाना सही समय पर खाना चाहिए क्योंकि रात के खाने के बाद हम कितनी देर में सोने जा रहे हैं यह स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत मायने रखता है. अगर आप रात के खाने और सोने के बीच में दो घंटे का अंतराल नहीं रखते हैं तो आप गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं.

by Taboola

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जी हां कैंसर के एक नए अध्ययन में यह बात समाने आई है. यह स्टडी बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने किया है.

क्या कहता है नया अध्ययन
यह नया अध्ययन बताता है कि लंबे समय तक रात 9 बजे के बाद खाना, खाने और सोने के बीच दो घंटे का अंतराल नहीं नहीं छोड़ना कैंसर का कारण बन सकता है. अन्य के मुकाबले ऐसे लोगों में कैंसर होने का खतरा 25 फीसदी ज्यादा होता है.

किन पर हुआ अध्ययन ?
प्रोस्टेट कैंसर के 621, स्तन कैंसर के 1,205 मरीजों इस अध्ययन में शामिल थे. इनमें 872 पुरुष और 1,321 महिला थीं. इन लोगों ने कभी नाइट शिफ्ट में काम नहीं किया था. इनसे भोजन के समय, सोने के समय के बारे में पूछा गया था.

इनमें से जिन्होंने कहा कि उनके रात के खाने और सोने के बीच अंतराल दो घंटे या उससे अधिक था तो उनमें स्तन और प्रोस्टेट कैंसर का संयुक्त जोखिम 20 प्रतिशत कम पाया गया. हालांकि, जब इसे देर से खाने के साथ जोड़ा गया, तो जोखिम 25 फीसदी तक बढ़ गया.

क्या कहती हैं अध्ययन की लेखिका
अध्ययन कीप्रमुख लेखक डॉक्टर मानोलिस कोगेविनास के मुताबिक इस अध्ययन का निष्कर्ष है कि डेली खाने के पैटर्न का पालन करने से कैंसर का जोखिम कम हो सकता है. हालांकि खाने का समय कैंसर के जोखिम को क्यों प्रभावित करता है, इसे बताने के लिए और रिसर्च की जरूरत है जबकि कुछ सबूत संकेत देते हैं कि यह नींद पैटर्न में व्यवधान के कारण हो सकता है. दरअसल डब्ल्यूएचओ की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने 2007 में निष्कर्ष निकाला था कि शिफ्ट का काम जिसमें सर्कैडियन व्यवधान शामिल है, जो नींद के पैटर्न में बदलाव से जुड़ा है, कैंसर पैदा करने की क्षमता वाला कारक होता है.

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