योगी सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अब दूसरे तरीके की आधुनिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ा औद्यागिक मिशन अभियान चला रही है. 

New Plan of Yogi Government: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पश्चिमी UP को लेकर एक नया और बड़ा प्लान तैयार किया है. नए प्लान के मुताबिक अब पश्चिमी UP का मेरठ गन्ने के बाद ड्रैगन फ्रूट के खेती के लिए भी जाना जाएगा. मेरठ के लिए योगी सरकार ने औद्यागिक मिशन की नई पहल की है.

क्या है पूरा प्लान?

योगी सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अब दूसरे तरीके की आधुनिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ा औद्यागिक मिशन अभियान चला रही है. इसके तहत यूपी सरकार किसानों को अनुदान भी दे रही है. ऐसे में अपनी आय को बढ़ाकर दोगुना करने के लिए किसानों ने औद्यानिक खेती की ओर रुख करना शुरू कर दिया है.

यूपी का शुगर बाउल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है और इसलिए इसे शुगर बाउल भी कहा जाता है. गन्ने के बाद अब बारी ड्रैगन फ्रूट की खेती की है, पश्चिमी यूपी के किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती में जोर शोर हिस्सा लें इसके लिए सरकार इन अन्नदाताओं को विशेष अनुदान भी उपलब्ध करा रही है और यूपी सरकार को अपने इस मिशन में सफलता भी मिल रही है. इस औद्यागिक मिशन के तहत किसान अपनी परंपरागत खेती छोड़कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं. मिशन के तहत किसान बड़ी मात्रा में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं.

5वें साल से 8 लाख की आमदनी

मेरठ के प्रगतिशील किसानों नें अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही गन्ने की खेती के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती भी जोर शोर से शुरू कर दी है. यहां के एक किसान सचिन ने ये खेती मवाना क्षेत्र के भैंसा गांव में शुरू की है. उनका कहना है कि पिछले साल अप्रैल में उन्होंने गुजरात से 1600 पौधे लाकर एक एकड़ में उसकी रोपाई की थी. इसके लिए एक एकड़ में 400 पोल खड़े किए गए और प्रति पोल पर चार पौधे कैक्टस बेल की तरह लगाए गए, हालांकि इस पर फूल आना शुरू हो गए हैं और कुछ ही समय में ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा. उन्होंने ये भी बताया कि एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए लगभग पांच लाख रुपये की लागत आई है. फुटकर बाजार में ड्रैगन फ्रूट के एक पीस की कीमत 200 से 250 रुपये तक होती है. अप्रैल से अक्टूबर तक फल का उत्पादन होगा. ड्रैगन फ्रूट के पौधे की आयु 15 से 20 वर्ष होती है. सचिन का मानना है कि पांचवें साल से उन्हें लगभग सालाना आठ लाख रुपये की आमदनी होनी शुरू हो जाएगी.

इजराइल की ड्रिप सिंचाई तकनीक से हो रही खेती 

भूमि के गिरते जलस्तर को देखते हुए पानी बचा कर सिंचाई करने के लिए पश्चिमी यूपी के किसानों ने एक खास उपाय निकाल लिया है और उस पद्दति से उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती करनी शुरू कर दी है. ड्रैगन फ्रूट के खेत में सचिन चौधरी जैसे पांच और किसानों नें सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इस तकनीक से जल संरक्षण तो होगा ही साथ ही बिजली की भी बचत की जा सकेगी. उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन होने पर वह उस फल को बेचने के लिए दिल्ली की गाजीपुर मंडी समेत अपने गांव के आसपास की बड़ी मंडियों में भी जाएंगे.

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