Monkeypox का खतरा बढ़ता जा रहा है. इस खतरनाक बीमारी के मामले पिछले 10 दिन में 7477 तक बढ़ गए हैं. हालांकि 4 हफ्तों के बाद मंकीपॉक्स के केस में 21% की कमी दर्ज हुई है. 

दुनिया भर में मंकीपॉक्स का खतरा बढ़ता जा रहा है. इस खतरनाक बीमारी के मामले पिछले 10 दिन में 7477 तक बढ़ गए हैं. हालांकि 4 हफ्तों के बाद मंकीपॉक्स के केस में 21% की कमी दर्ज हुई है. आंकड़ों पर नजर डालें तो  1 जनवरी से 22 अगस्त के बीच मंकीपॉक्स के 41664 केस दर्ज हुए हैं. कुल 96 देशों में फैल चुकी इस बीमारी से अब तक 112 लोगों की मौत हो गई है. 

10 अगस्त से 22 अगस्त के बीच यानी तकरीबन 10 दिनों में ही यह बीमारी 7 नए देशों में फैल गई और 10 दिन में 13 हजार से ज्यादा नए केस दर्ज हुए. इन 10 दिनों में मंकीपॉक्स से एक व्यक्ति की मौत भी हो गई. 96 देशों में से 23 देश ऐसे हैं जिनमें केस बढ़े हैं.
 
इस बीमारी के 10 दिन में 50% से ज्यादा केस बढ़ गए हैं. सबसे ज्यादा 60% केस अमेरिका में और 38% केस यूरोप में बढ़े हैं. वह 10 देश जहां सबसे ज्यादा मामले हैं उनमें यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, स्पेन, जर्मनी, ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, कनाडा, नीदरलैंड्स और पुर्तगाल है. इन 10 देशों में मंकीपॉक्स के कुल मामलों के 89% केस हैं. पिछले एक हफ्ते में दो नए देश ऐसे हैं जिन्होंने मंकीपॉक्स का मामला पहला केस दर्ज किया है. यह दो देश हैं ईरान और इंडोनेशिया. 

हालांकि 16 देश ऐसे भी हैं जहां पिछले 1 हफ्ते से कोई नया केस नहीं आया है. दक्षिण पूर्व एशिया में मंकीपॉक्स के कुल 14 केस हैं. इनमें से 10 मामले भारत में हैं. हालांकि भारत सबसे कम प्रभावित देशों की श्रेणी में आता है.

पुरुषों को मंकीपॉक्स का खतरा

अभी तक का ट्रेंड बता रहा है कि यह बीमारी युवाओं को और खास तौर पर पुरुषों को अपना शिकार बना रही है. इस बीमारी के कुल केस में से 98% केस युवा पुरुषों के ही है . कुल केस में से 95% पुरुष पुरुषों के ही साथ सेक्स करने वाले लोग पाए गए हैं. सभी 100% केसों में सेक्सुअल एक्टिविटी की वजह से मंकीपॉक्स फैला है. तकरीबन 60% लोगों को यह बीमारी किसी पार्टी में जाने के दौरान ही हुई है. कुल कन्फर्म केस में से 45% लोग एचआईवी पॉजिटिव है.

भारत मंकीपॉक्स की वैक्सीन बनाने के लिए तैयार है. आईसीएमआर ने मंकीपॉक्स के वायरस को आइसोलेट कर लिया है जो भी फार्मा कंपनी मंकीपॉक्स की वैक्सीन बनाने में दिलचस्पी रखती हैं वह आईसीएमआर से संपर्क कर सकती हैं. हालांकि बीमारी के ट्रेंड को देखते हुए यह भी साफ है कि मांग की मंकीपॉक्स की वैक्सीन की जरूरत भारत में ज्यादा लोगों को नहीं होगी. हालांकि यह वैक्सीन निर्यात के लिए मौजूद रहेगी. कुछ फार्मा कंपनियों ने मंकी पॉक्स वैक्सीन बनाने में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन अभी किसी के भी साथ कोई आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ है.

किसको लगानी चाहिए मंकीपॉक्स की वैक्सीन

वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइंस के मुताबिक मंकीपॉक्स के कन्फर्म केस के संपर्क में आए लोग संपर्क में आने के 4 दिन के अंदर वैक्सीन लगा सकते हैं. पहले से बचाव के लिए वैक्सीन लगाने वाले लोगों में पुरुषों के साथ सेक्स करने वाले पुरुष और हेल्थ केयर वर्कर संभावित कैंडिडेट हो सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स बीमारी के वैरियंट को नया नाम दिया है. अफ्रीका में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली इस बीमारी का कांगो रीजन का वैरियट क्लेड वन कहलाएगा, जबकि पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाने वाला मंकीपॉक्स वैरियंट क्लेड 2 कहलाएगा.  

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