Kapil Sibal left Congress: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्य सभा चुनाव के लिए पर्चा भरा. इससे पहले उन्होंने 16 मई को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है.

Kapil Sibal left Congress Party: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने अपनी पार्टी छोड़ दी है और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के समर्थन से बुधवार को राज्य सभा चुनाव के लिए पर्चा भरा है. कपिल सिब्बल ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की मौजूदगी में नॉमिनेशन दाखिल किया. इस दौरान अखिलेश यादव के अलावा सपा सांसद राम गोपाल यादव भी मौजूद थे.

कपिल सिब्बल ने 16 मई को दे दिया था कांग्रेस से इस्तीफा

सपा के समर्थन से राज्य सभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने बताया कि उन्होंने 16 मई को कांग्रेस को इस्तीफा सौंप दिया था. नामांकन दाखिल करने के बाद कपिल सिब्बल ने कहा, ‘मैंने 16 मई को कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है. मैं हमेशा से देश में एक स्वतंत्र आवाज बनना चाहता हूं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘स्वतंत्र आवाज होना जरूरी है. विपक्ष में रहकर हम गठबंधन बनाना चाहते हैं ताकि हम मोदी सरकार का विरोध कर सकें.’

सपा और खुद की राय पेश करेंगे: अखिलेश यादव

कपिल सिब्बल के नामांकन के बाद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा, ‘आज कपिल सिब्बल ने नामांकन दाखिल किया. वह सपा के समर्थन से राज्य सभा जा रहे हैं. दो और लोग सदन में जा सकते हैं. कपिल सिब्बल वरिष्ठ वकील हैं. उन्होंने संसद में अपनी राय बखूबी पेश की है. हमें उम्मीद है कि वह सपा और खुद दोनों की राय पेश करेंगे.’

उत्तर प्रदेश में 11 राज्य सभा सीटों पर चुनाव

बता दें कि उत्तर प्रदेश में राज्य सभा की 11 सीटों पर चुनाव होने हैं. इसमें से भारतीय जनता पार्टी सात और समाजवादी पार्टी (SP) तीन सीट जीत सकती है. वहीं 11वीं सीट के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी और इसके लिए चुनाव की आवश्यकता होगी.

कई पार्टियों की कानूनी मदद करते हैं सिब्बल

कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) वरिष्ठ वकील हैं और कई राजनीतिक पार्टियों को कानूनी मदद दे चुके हैं. सिब्बल कानूनी रूप से विभिन्न हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में समाजवादी पार्टी के अलावा कई अन्य पार्टियों के नेताओं के अदालती मामलों में शामिल हैं.

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