Amitabh Bachchan Allahabad connection: अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता को मापने का कोई ठीक-ठीक पैमाना नहीं है. वह जो भी करते है, वह यादगार बन जाता है. जीवन में वह एक बार राजनीति में उतरे, एक बार चुनाव लड़े और जीते. उसकी भी ढेर सारी यादें हैं. उस चुनाव में कुछ ऐसा भी हुआ था. पढ़िए.

Amitabh Bachchan in politics: महानायक अमिताभ बच्चन भले ही एक बार देश के चुनावों में उतरे हों, लेकिन यह बात हमेशा के लिए लोगों की स्मृति में दर्ज हो गई. 1984 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा के विरुद्ध इलाबाद से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. यह अलग बात है कि तीन साल बाद ही उन्होंने संसद से इस्तीफा दे दिया और हमेशा के लिए सक्रिय राजनीति को अलविदा कह दिया. उन चुनावों में अमिताभ से जुड़ी कई रोचक बातें हैं. अमिताभ ने उन चुनावों में राजीतिक व्यक्तित्व के रंग दिखाए थे और कहा था कि बहुगुणाजी मुझसे बहुत वरिष्ठ हैं और उनके विरुद्ध मैं एक भी शब्द नहीं बोलूंगा. अमिताभ ने हेमवती नंदन बहुगुणा के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा था.

मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है
हेमवती नंदन बहुगुणा किसी समय कांग्रेसी थे और उनकी इलाहाबाद से जीत तय मानी जा रही थी. तब कांग्रेस ने अमिताभ को उनके विरुद्ध उतारने का फैसला किया था. अमिताभ अपने दोस्त राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में आए थे. कहा जाता है कि इलाहाबाद की सीट पर अमिताभ का रंग नहीं जम पा रहा था और बहुगुणा के समर्थक नचनिया कह कर उनका मजाक उड़ाते थे. लेकिन बाजी तब पलटी जब जया बच्चन ने वहां ‘बहू’ के रूप में एंट्री की और अमिताभ को बहुगुणा को हराने के लिए कहना पड़ा, ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है.’ अमिताभ का क्रेज बढ़ता चला गया और चुनाव में वोट डालने के लिए इतने लोग उतरे कि कुछ जगहों पर रात को दस बजे तक वोटिंग चली. कुछ बूथ ऐसे थे जहां 95 से 100 फीसदी वोट पड़े. चुनाव आयोग ने हैरानी जताई कि क्या इन जगहों पर चुनाव के दौरान कोई बीमार बिस्तर में नहीं था.

मतदान पत्र पर लिपस्टिक
जो लोग कह रहे थे कि बहुगुणा जैसे मंजे हुए नेता से अमिताभ जीत नहीं पाएंगे, वह तब हैरान रह गए जब इस सुपर स्टार ने दिग्गज लीडर को एक लाख 87 हजार रिकॉर्ड मतों के अंतर से हराया. लेकिन मतगणना के दौरान एक बहुत रोचक बात सामने आई. अमिताभ की जीत का अंतर और बड़ा होता लेकिन उन्हें मिले करीब 4000 वोट गिनती के दौरान रद्द कर दिए गए. इसकी वजह कमाल की थी. अमिताभ को वोट देने वाली महिला फैन्स की संख्या तो जबर्दस्त थी, लेकिन उनमें से करीब चार हजार महिलाओं ने मुहर लगाने के बजाय मतपत्रों को चूम कर अपनी लिपस्टिक का निशान अमिताभ के नाम पर लगा दिया था. खैर, अमिताभ का राजनीतिक अनुभव अच्छा नहीं रहा और संसद से इस्तीफा देने के बाद में उन्होंने दुख जताया कि मैंने चुनाव प्रचार के दौरान इलाहाबाद की जनता से जो वादे किए थे, मैं पूरे नहीं कर पाया. वैसे सच यह भी है कि चुनाव जीतने के बाद अमिताभ फिल्मों में व्यस्त थे और कभी अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं लौटे. सांसद रहते हुए आई उनकी फिल्म मर्द ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की थी.

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